बस्तर से केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने से पहले 50 थाने खोले जाएंगे, 5800 जवानों की भर्ती होगी…
इम्पेक्ट न्यूज। रायपुर।
बस्तर से केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाने से पहले 50 थाने खोले जाएंगे। जैसे ही नए थाने खुलेंगे, वैसे ही बेहद संवेदनशील रहे इन इलाकों में केंद्रीय फोर्स की तैनाती तेज कर दी जाएगी। पहले चरण में बस्तर के 7 जिलों में करीब 50 जगहों को थानों के लिए चिन्हांकित कर प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस पूरी व्यवस्था को मजबूत करने और आम जनता को सीधे मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने बस्तर इलाके में तैनाती हेतु नए जवानों की भर्ती का खाका भी तैयार कर लिया है। सबसे खास बात यह है कि योजना के मुताबिक इन जवानों की भर्ती में बस्तर इलाके के ही स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। अफसरों के मुताबिक, यह पहले चरण की प्रक्रिया है।
छत्तीसगढ़ में 31 मार्च को अधिकृत तौर पर नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा के बाद अब बस्तर के चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षा बलों को लेकर सरकार ने योजना तैयार कर ली है। जिन अंदरूनी इलाकों में सालों से केंद्रीय सुरक्षा बल (सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज) मोर्चा संभाले हुए थे, अब वहां से उनकी रवानगी की तैयारी शुरू हो गई है।
हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में कोई खालीपन न आए और आम जनता खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करे, इसके लिए सरकार पहले चरण में बस्तर के जिलों में 50 से अधिक नए थाने खोलने जा रही है। 58 सौ जवानों के लिए भर्ती होगी। इसका बकायदा प्रस्ताव भेज दिया गया है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित मोर्चों पर फिलहाल 65 बटालियन सशस्त्र सेवा बल के जवान तैनात हैं। इनमें ज्यादा केंद्रीय जवान तैनात हैं। इनमें आईटीबीपी, सीआरपीएफ, और बीएसएफ के अलावा बस्तर इलाके से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक की सुरक्षा में लगीं एसआईएसएफ फोर्स भी शामिल हैं।
आंकड़ों के लिहाज से राज्य में अभी आईटीबीपी के करीब 8 हजार से अधिक और बीएसएफ के 4 हजार से ज्यादा जवान अलग-अलग इलाकों में मुस्तैद हैं, जबकि सबसे बड़ी संख्या सीआरपीएफ जवानों की है। पुलिस मुख्यालय के जानकारों के अनुसार अब केंद्र सरकार इन चारों प्रमुख बलों को मणिपुर में तैनात करने की तैयारी कर रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ से इसी महीने से इनकी जल्द से जल्द रवानगी शुरू करने का खाका खींचा गया है।
31 मार्च को नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा के साथ ही फोर्स की नक्सल प्रभावित जिलों से रवानगी की रूपरेखा तय कर ली गई थी। राज्य के 14 नक्सल प्रभावित जिलों में से 7 जिलों से फोर्स को हटा भी लिया गया है। लेकिन बस्तर संभाग के जिलों के साथ-साथ मोहला-मानपुर और गरियाबंद में अभी भी इन्हें तैनात रखा गया है। दरअसल, ये सभी इलाके अन्य राज्यों की सीमाओं से सटे हुए हैं। ऐसे में इस बात का खतरा बना हुआ है कि दूसरे राज्यों में सक्रिय नक्सली या बाहरी तय इन रास्तों से आकर दोबारा अपनी मुहिम शुरू न कर सकें।
इसी संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इन इलाकों से एकाएक फोर्स खाली नहीं कर रही है। यही कारण है कि केंद्रीय बलों की जगह अब यहां छत्तीसगढ़ पुलिस के पक्के थाने स्थापित किए जा रहे हैं।
बस्तर में विकास के अन्य कार्यों के साथ थाना भवन खोलने और जवानों की भर्ती का कार्य भी तेजी से जारी है। इसके लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने राज्य शासन के जिम्मेदार से अपने पिछले दौरे के दौरान स्पष्ट कहा था कि किसी भी स्थिति में बस्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर और थाने खुलने में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ही जल्द भर्ती के निर्देश दिए थे। उसी के बाद प्रक्रिया शुरू की गई है।

