Thursday, August 20, 2026

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हम खबर बनाते नहीं, बताते हैं

बस्तर इम्पेक्ट (Bastar Impact) छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख क्षेत्रीय समाचार पत्र और डिजिटल न्यूज़ मीडिया नेटवर्क है, जो मुख्य रूप से दंतेवाड़ा (बस्तर संभाग) और राज्य की राजधानी रायपुर से संचालित व प्रकाशित होता है। बस्तर जैसे सुदूर और जनजातीय बहुल क्षेत्र की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने में इस मीडिया संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इसके बारे में विस्तार से जानकारी निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझी जा सकती है:

1. मुख्य ध्येय वाक्य (Tagline)

बस्तर इम्पेक्ट का आधिकारिक स्लोगन “हम खबर बनाते नहीं, बताते हैं” है। यह वाक्य इसकी पत्रकारिता के मूल सिद्धांत को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य सनसनीखेज खबरों के बजाय ज़मीनी हकीकत और तथ्यों को पाठकों के सामने लाना है।

2. समाचार कवरेज और प्राथमिकताएं

यह प्रकाशन छत्तीसगढ़ के दो अलग-अलग भौगोलिक और प्रशासनिक क्षेत्रों के बीच एक सेतु का काम करता है:

  • बस्तर संभाग (दंतेवाड़ा केंद्र): दंतेवाड़ा से संचालित होने के कारण यह बस्तर की स्थानीय समस्याओं, आदिवासियों के जल-जंगल-ज़मीन से जुड़े मुद्दों, स्थानीय संस्कृति, त्योहारों और अंदरूनी क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों को मुख्यधारा में लाता है। इसके अलावा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की ज़मीनी और संवेदनशील रिपोर्टिंग भी इसके कवरेज का हिस्सा होती है।
  • रायपुर केंद्र: राजधानी रायपुर से प्रकाशित होने के कारण यह राज्य स्तर के बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों, प्रशासनिक फैसलों, कैबिनेट निर्णयों और शासकीय कल्याणकारी योजनाओं की खबरों को त्वरित गति से बस्तर और राज्य के अन्य हिस्सों तक पहुँचाता है।

3. डिजिटल उपस्थिति और ई-पेपर (e-Paper)

बदलते दौर के साथ बस्तर इम्पेक्ट ने डिजिटल मीडिया में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई है:

  • वेबसाइट: इसकी आधिकारिक वेबसाइट bastarimpact.org है, जहाँ छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया से जुड़ी खबरें लगातार अपडेट की जाती हैं।
  • ई-पेपर सुविधा: पाठकों के लिए इसकी वेबसाइट पर नियमित रूप से बस्तर इम्पेक्ट ई-पेपर (e-paper) का डिजिटल संस्करण भी आर्काइव के साथ उपलब्ध कराया जाता है, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों या राज्य से बाहर रहने वाले लोग भी रोज़ की खबरों को आसानी से पढ़ सकें।

4. सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

क्षेत्रीय स्तर पर इस समाचार पत्र का बड़ा प्रभाव है। बस्तर के ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों की जिन समस्याओं को बड़े राष्ट्रीय मीडिया घराने जगह नहीं दे पाते, उन्हें बस्तर इम्पेक्ट प्रमुखता से उजागर करता है, जिससे अक्सर स्थानीय प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।


इसके प्रधान संपादक सुरेश महापात्र हैं। जिन्होंने 1989 में ग्रामीण पत्रकारिता से अपनी शुरूआत की और स्थानीय और राष्ट्रीय हिंदी दैनिक समाचार पत्रों में वर्षों तक उल्लेख​नीय काम किया। अतिसंवेदनशील माओवाद प्रभावित इलाके में सलवा जुड़ूम के दौर को राष्ट्रीय स्तर पर कव्हर किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इनके विचार प्रकाशित हो चुके हैं। 2008 में दैनिक भास्कर से त्यागपत्र देकर दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र से बस्तर इम्पेक्ट दैनिक अखबार की शुरूआत की और इसमें लगातार सक्रिय हैं। बस्तर इम्पेक्ट ने मुख्यधारा की पत्रकारिता को बस्तर की ओर मुखर करने का प्रयास किया है। मुख्यधारा की पत्रकारिता में बस्तर का इम्पेक्ट प्रस्तुत करने में कामयाबी के साथ छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों की ज़मीनी सच्चाइयों को सरकार और जनता के समक्ष निष्पक्षता से प्रस्तुत करने का एक विश्वसनीय माध्यम है।