Sunday, July 5, 2026
Bastar Division

मौत के ‘डेथ ट्रैप’ में तब्दील हो रही NMDC की स्लरी पाइपलाइन, मासूमों की जान दांव पर!

  • लापरवाही की हद: पिछले साल गीदम और भांसी में डूबे थे दो मासूम, फिर भी नहीं चेता प्रशासन और L&T कंपनी।
  • प्रतिबंध बेअसर: जून से माइनिंग और खुदाई पर रोक के बावजूद धड़ल्ले से खोदे जा रहे हैं 10 फीट गहरे जानलेवा गड्ढे।

बचेली-नगरनार मार्ग पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

दंतेवाड़ा/सातधार:
बचेली से नगरनार स्टील प्लांट तक बिछाई जा रही एनएमडीसी (NMDC) की 138 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी स्लरी पाइपलाइन परियोजना अब बस्तर के ग्रामीणों के लिए काल बनती जा रही है। समय सीमा में काम पूरा करने के दबाव में सुरक्षा मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मानसून की भारी बारिश के बीच सातधार के पास बिना किसी सुरक्षा घेरे (बैरिकेडिंग) के करीब 50 मीटर लंबा और 10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर लावारिस छोड़ दिया गया है।


लगातार हो रही बारिश और पाइपलाइन से हो रहे पानी के रिसाव (लीकेज) के कारण यह गड्ढा अब पूरी तरह लबालब भर चुका है। इस मार्ग से चौबीसों घंटे स्थानीय आदिवासियों और मवेशियों की आवाजाही रहती है, जिससे यहाँ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

अतीत के हादसों से भी नहीं लिया सबक

यह कोई पहली लापरवाही नहीं है। पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान इसी तरह खुले छोड़े गए गड्ढों में डूबने से गीदम और भांसी क्षेत्र में दो मासूम बच्चों की असमय मौत हो गई थी। उन हादसों के बाद पुलिस ने एफआईआर (FIR) भी दर्ज की थी और जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जून से बारिश खत्म होने तक खुदाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन धरातल पर प्रशासन का यह अल्टीमेटम बेअसर साबित हो रहा है। प्रतिबंध के बावजूद मानसून में भी धड़ल्ले से खुदाई जारी है, जो प्रशासनिक मुस्तैदी और दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

ग्रामीणों का आक्रोश:
“काम में तेजी लाना ठीक है, लेकिन आदिवासियों और ग्रामीणों की जान की कीमत पर यह विकास हमें बर्दाश्त नहीं है। ठेकेदार कंपनी को न तो प्रशासन के नियमों का डर है और न ही लोगों की जान की परवाह।” – स्थानीय ग्रामीण, सातधार क्षेत्र

L&T कंपनी पर मनमानी और तानाशाही का आरोप

परियोजना का निर्माण कर रही एलएंडटी (L&T) कंपनी पर कुम्हाररास, टेकनार और सातधार के ग्रामीणों ने मनमानी का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन उनकी आपत्तियों को हवा में उड़ा देता है। क्षेत्र में कई जगहों पर गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं, जहां न तो कोई सुरक्षा घेरा है, न ही रात के लिए रिफ्लेक्टर या रेड टेप लगाए गए हैं।

परियोजना एक नज़र में (Project File)

  • कुल लंबाई: 138 किलोमीटर (बचेली से चोकावाड़ा-नगरनार)
  • अनुमानित लागत: ₹2,900 करोड़ से ₹3,500 करोड़ रुपए
  • परिवहन क्षमता: 15 मिलियन टन लौह अयस्क (सालाना)
  • उद्देश्य: बचेली से सीधे नगरनार स्टील प्लांट तक कच्चे माल की निर्बाध सप्लाई।

लोगोब की मांग

विकास की रफ्तार किसी मासूम की जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती। जिला प्रशासन को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर काम को रुकवाना चाहिए और सबसे पहले संवेदनशील इलाकों में मुकम्मल सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) सुनिश्चित करवाना चाहिए ताकि पिछले साल जैसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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